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उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल से हरिपुर कालसी को फिर मिलेगा धार्मिक और आध्यात्मिक तीर्थ स्थल का गौरव

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून जनपद के हरिपुर कालसी में निर्माणाधीन राज्य के पहले भव्य यमुना घाट के कार्यों को जुलाई माह तक पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास सीएम धामी द्वारा वर्ष 2024 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर किया गया था।

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप हरिपुर कालसी को धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल के रूप में पुनः स्थापित करने की दिशा में यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। घाट निर्माण कार्य के लिए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो इस महत्वाकांक्षी परियोजना की देखरेख कर रहा है।

देवभूमि उत्तराखंड यमुनोत्री धाम के रूप में मां यमुना के उद्गम स्थल की भूमि होने के बावजूद राज्य में अब तक ऐसा कोई विकसित घाट नहीं था, जहां श्रद्धालु स्नान एवं धार्मिक अनुष्ठान कर सकें। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस आवश्यकता को गंभीरता से लेते हुए इसे अपनी घोषणा सूची में शामिल किया और हरिपुर कालसी में भव्य यमुना घाट निर्माण का संकल्प लिया।

करीब एक किलोमीटर लंबे इस घाट को उत्तराखंड में यमुना का पहला विशाल घाट होने का गौरव प्राप्त होगा, जहां हजारों श्रद्धालु स्नान एवं पूजा-अर्चना कर सकेंगे। ऐतिहासिक उल्लेखों के अनुसार हरिपुर यमुना घाट कभी एक प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थल हुआ करता था, जो बाढ़ में बह गया था। मुख्यमंत्री धामी ने इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर को पुनर्जीवित करने का संकल्प लेते हुए यहां भव्य घाट निर्माण की शुरुआत कराई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार हरिपुर यमुना घाट को एक प्रमुख धार्मिक धाम के रूप में विकसित करने के लिए पूर्ण रूप से वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जौनसार-बावर क्षेत्र सहित श्रीकृष्ण एवं मां यमुना में आस्था रखने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा का केंद्र बनेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि आगामी बजट में भी इस परियोजना के लिए धनराशि का प्रावधान किया गया है तथा प्रशासन को जुलाई माह तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बीच हरिपुर जमुना घाट के समीप पुराने पुल के पिलर पर 25 फुट ऊंची मां यमुना की भव्य प्रतिमा स्थापित किए जाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। घाट के समीप विशाल मंदिर निर्माण हेतु भूमि भी दान स्वरूप प्राप्त हुई है, जिस पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

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