Add more content here...
उत्तर प्रदेशट्रेंडिंग

Maa Shakumbhari Devi: सहारनपुर के इस पावन धाम में नवरात्र की धूम, क्यों खास हैं मां के ये 4 स्वरूप?

पहाड़ियों के बीच गूंजे जयकारे: मां शाकंभरी देवी के दरबार में लगी लंबी लाइन

सहारनपुर: नवरात्र की शुरुआत होते ही देशभर में मां दुर्गा की भक्ति की धूम मच गई है। मंदिरों में श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ रहा है और चारों ओर माता रानी के जयकारे गूंज रहे हैं। कुछ ऐसा ही अलौकिक और भव्य नजारा इन दिनों उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां शाकंभरी देवी के दरबार में देखने को मिल रहा है। शिवालिक की सुरम्य पहाड़ियों के बीच बसे इस पावन धाम में नवरात्र के दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।

कोई हाथों में नारियल और चुनरी लेकर मन्नत मांग रहा है, तो कोई मां के चरणों में शीश झुकाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहा है। आस्था का आलम यह है कि इन दिनों हर रास्ता माता के दरबार की ओर ही जाता दिखाई दे रहा है।

पहाड़ियों के बीच बसा है पावन धाम

सहारनपुर जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर शिवालिक की सुंदर पहाड़ियों के बीच मां शाकंभरी देवी का यह प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। नवरात्र के पावन दिनों में यहां सुबह तड़के से ही माता के दर्शन के लिए किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती हैं। हाथों में पूजा की थाली, नारियल और चुनरी लिए श्रद्धालु ‘जय माता दी’ के नारे लगाते हुए आगे बढ़ते हैं। पहाड़ियों के बीच गूंजते माता रानी के जयकारे पूरे वातावरण को भक्तिमय बना रहे हैं।

कई राज्यों से पहुंच रहे हैं लाखों श्रद्धालु

मां शाकंभरी देवी का यह धाम धार्मिक आस्था और प्राचीन मान्यताओं के लिए अपनी एक विशेष पहचान रखता है। मान्यता है कि माता के दरबार में सच्चे मन से जो भी मुराद मांगी जाती है, मां उसे जरूर पूरी करती हैं। यही अटूट विश्वास श्रद्धालुओं को बार-बार इस पावन धाम तक खींच लाता है। नवरात्र के अवसर पर यहां उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों से भारी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं।

मां के चार स्वरूपों की है विशेष महिमा

मां शाकंभरी देवी को ‘शाक’ यानी सब्जियों और वनस्पतियों से जुड़ी देवी के रूप में पूजा जाता है। इस पावन सिद्धपीठ में मां के चार दिव्य स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है:मां शाकंभरी देवी,
मां शताक्षी देवी,मां भीमा देवी,मां भ्रामरी देवी

नवरात्र के दिनों में मंदिर परिसर के आसपास का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है। चारों तरफ प्रसाद, नारियल, चुनरी और पूजा सामग्री की दुकानें सजी हुई हैं और श्रद्धालुओं की चहल-पहल से पूरा क्षेत्र जीवंत हो उठा है।

क्या है मां शाकंभरी देवी की प्राचीन कथा?

मंदिर से जुड़ी एक प्राचीन और बेहद रोचक कथा प्रचलित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में धरती पर एक बार बहुत भयंकर सूखा पड़ा था। खेत-खलिहान, नदियां और जंगल पूरी तरह सूख गए थे। पानी और भोजन के अभाव में चारों ओर हाहाकार मच गया और जनजीवन संकट में आ गया।

इस घोर विपत्ति के समय साधु-संतों और देवताओं ने मां दुर्गा की कठोर आराधना की। भक्तों की करुण पुकार सुनकर देवी ने ‘शाकंभरी’ स्वरूप में अवतार लिया। उन्होंने अपने शरीर से उत्पन्न शाक-सब्जियों, वनस्पतियों और फलों से पूरी धरती को फिर से हरा-भरा कर दिया। मां के इस कृपालु रूप के कारण ही उनका नाम ‘मां शाकंभरी देवी’ पड़ा और तब से उन्हें जीवन का रक्षक मानकर पूजा जाता है।

आस्था और आत्मिक शांति का केंद्र
नवरात्र के इन पावन दिनों में मां शाकंभरी देवी का दरबार श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का एक अद्भुत संगम बन चुका है। किसी की आंखों में मनोकामना पूरी होने की उम्मीद है, तो कोई परिवार की खुशहाली के लिए मां से आशीर्वाद मांग रहा है। पहाड़ियों के बीच बसे इस सिद्धपीठ में उमड़ता आस्था का यह सैलाब साबित करता है कि भक्तों के लिए मां का दरबार केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि परम शांति और आत्मिक सुकून का केंद्र है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button